Speechless

Struggled for a while wondering what an appropriate title for this post would be… Song of the day wouldn’t do justice… lump in my throat wouldn’t do it either…… Gulzar leaves me speechless yet again.

 

तुझसे नाराज़ नही ज़िंदगी हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं।

जीने के लिए सोचा ही नहीं दर्द सँभालने होंगे
मुस्कुराऊँ तो मुस्कुराने के क़र्ज़ उतारने होंगे
मुस्कुराऊँ कभी तो लगता है
जैसे होंठों पे क़र्ज़ रखा है।

तुझसे नाराज़ नही ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं

ज़िंदगी तेरे गम ने हमें रिश्ते नए समझाये
मिले जो हमें धूप में मिले छाँव के ठंडे साए

तुझसे नाराज़ नही ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं

आज अगर भर आई है बूँदें बरस जायेंगी
कल क्या पता इनके लिए आखें तरस जायेंगी
जाने कब कहाँ गुम कहाँ खोया
एक आंसू चुपके रखा था।

तुझसे नाराज़ नही ज़िंदगी, हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं।